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स्क्रीनप्ले राइटिंग गाइड फॉर बिगिनर्स

  • Writer: Mister Bhat
    Mister Bhat
  • Jun 21
  • 6 min read

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(शुरुआती लेखकों के लिए आसान और प्रैक्टिकल मार्गदर्शिका)


अध्याय 1

स्क्रीनप्ले आखिर होता क्या है?

बहुत सारे नए लेखक कहानी लिखना तो शुरू कर देते हैं, लेकिन उन्हें यह समझ नहीं आता कि कहानी और स्क्रीनप्ले में अंतर क्या होता है।

मान लीजिए आपने एक कहानी लिखी –

"राहुल सुबह उठा। वह बहुत परेशान था। उसे लग रहा था कि उसकी जिंदगी में कुछ गलत हो रहा है।"

यह एक कहानी है।

लेकिन स्क्रीनप्ले में हम दर्शकों को दिखाते हैं कि क्या हो रहा है।

उदाहरण:

INT. राहुल का कमरा – सुबह

अलार्म बज रहा है।

राहुल बिस्तर पर बैठा है। उसके चेहरे पर चिंता साफ दिखाई दे रही है।

मोबाइल स्क्रीन पर बैंक का मैसेज चमकता है।

"आपके खाते में ₹50 शेष हैं।"

राहुल गहरी सांस लेता है।

यही स्क्रीनप्ले है।

स्क्रीनप्ले में हम "दिखाते" हैं, केवल "बताते" नहीं हैं।

याद रखिए:

कहानी = क्या हुआ

स्क्रीनप्ले = दर्शकों को क्या दिखाई देगा

अगर आप फिल्म, वेब सीरीज, यूट्यूब शॉर्ट फिल्म, एनीमेशन या AI फिल्म बनाना चाहते हैं तो आपको स्क्रीनप्ले लिखना सीखना ही होगा।



अध्याय 2

एक अच्छी कहानी का जन्म कैसे होता है?

नए लेखक अक्सर सोचते हैं कि कोई जादुई आइडिया आएगा और फिर वे महान कहानी लिख देंगे।

लेकिन सच्चाई यह है कि ज्यादातर शानदार कहानियां हमारे आसपास ही होती हैं।

कहानी के आइडिया कहाँ से मिलते हैं?

• अपने जीवन से

• दोस्तों की घटनाओं से

• समाचारों से

• इतिहास से

• लोक कथाओं से

• सपनों से

उदाहरण:

एक लड़के को रोज एक अज्ञात नंबर से मैसेज आता है।

यही एक कहानी का बीज है।

अब सवाल पूछिए:

मैसेज कौन भेज रहा है?

क्यों भेज रहा है?

अगर लड़का जवाब नहीं देगा तो क्या होगा?

अगर देगा तो क्या होगा?

इन्हीं सवालों से कहानी आगे बढ़ती है।

एक अच्छा लेखक हमेशा जिज्ञासु होता है।

दुनिया को देखकर वह पूछता है –

"अगर ऐसा हो जाए तो क्या होगा?"

यहीं से नई कहानियां जन्म लेती हैं।



अध्याय 3

हीरो, विलेन और लक्ष्य

हर सफल फिल्म में एक चीज कॉमन होती है।

हीरो कुछ चाहता है।

कोई उसे रोक रहा होता है।

और उसे संघर्ष करना पड़ता है।

इसे आसान भाषा में समझिए।

हीरो = जो कुछ हासिल करना चाहता है

लक्ष्य = जो वह हासिल करना चाहता है

बाधा = जो उसे रोक रही है

उदाहरण:

हीरो: अर्जुन

लक्ष्य: राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बनना

बाधा: गरीबी

अब कहानी बन गई।

दूसरा उदाहरण:

हीरो: आरव

लक्ष्य: एक रहस्यमयी किताब ढूंढना

बाधा: खतरनाक संगठन

अब कहानी और रोमांचक हो गई।

याद रखिए।

जिस कहानी में संघर्ष नहीं होता, वह कहानी दर्शकों को बोर कर देती है।

संघर्ष ही कहानी की जान है।

इसलिए अपनी कहानी लिखते समय हमेशा यह तीन सवाल पूछिए:

  1. मेरा हीरो कौन है?

  2. वह क्या चाहता है?

  3. उसे कौन रोक रहा है?

अगर इन तीन सवालों का जवाब आपके पास है, तो आपकी कहानी सही दिशा में जा रही है।



अध्याय 4

तीन एक्ट स्ट्रक्चर को आसान भाषा में समझिए

दुनिया की लगभग हर सफल फिल्म, वेब सीरीज और शॉर्ट फिल्म एक खास ढांचे का पालन करती है। इसे Three Act Structure कहा जाता है।

नाम सुनकर यह कठिन लग सकता है, लेकिन वास्तव में यह बहुत आसान है।

एक्ट 1 – शुरुआत

यहाँ दर्शकों को आपकी दुनिया दिखाई जाती है।

हीरो कौन है?

वह क्या करता है?

उसकी समस्या क्या है?

उसका सपना क्या है?

उदाहरण:

रवि एक छोटे गांव में रहने वाला लड़का है। उसका सपना फिल्म निर्देशक बनना है।

अब दर्शक रवि को जान गए।

लेकिन केवल परिचय काफी नहीं है।

कुछ ऐसा होना चाहिए जो कहानी को आगे बढ़ाए।

मान लीजिए रवि को मुंबई की एक फिल्म कंपनी से इंटरव्यू कॉल आ जाता है।

यहीं से कहानी शुरू होती है।

इसे Inciting Incident कहा जाता है।


एक्ट 2 – संघर्ष

अब हीरो अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ता है।

लेकिन रास्ते में मुश्किलें आती हैं।

हर समस्या के बाद एक नई समस्या आती है।

यही हिस्सा सबसे लंबा होता है।

यहीं दर्शक हीरो के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ते हैं।

रवि मुंबई पहुंचता है।

उसके पास पैसे कम हैं।

रहने की जगह नहीं है।

कोई पहचान नहीं है।

बार-बार रिजेक्शन मिलता है।

लेकिन वह हार नहीं मानता।

यही संघर्ष कहानी को दिलचस्प बनाता है।


एक्ट 3 – परिणाम

अब अंतिम मुकाबला होता है।

हीरो जीतता है या हारता है।

दर्शकों को जवाब मिल जाता है।

रवि आखिरकार अपनी पहली फिल्म बनाने का मौका पा लेता है।

कहानी पूरी हो जाती है।

याद रखिए:

शुरुआत – समस्या

बीच – संघर्ष

अंत – परिणाम

यही सफल कहानी का सबसे मजबूत ढांचा है।



अध्याय 5

सीन कैसे लिखें?

कई नए लेखक कहानी तो अच्छी लिख लेते हैं लेकिन सीन कमजोर लिखते हैं।

सीन कहानी की ईंटें होते हैं।

जैसे घर ईंटों से बनता है, वैसे ही स्क्रीनप्ले सीनों से बनता है।

हर सीन का कोई उद्देश्य होना चाहिए।

अगर किसी सीन को हटाने से कहानी पर कोई असर नहीं पड़ता तो वह सीन जरूरी नहीं है।


एक अच्छे सीन के तीन नियम


1. सीन में लक्ष्य होना चाहिए

हर सीन में कोई न कोई कुछ चाहता हो।

उदाहरण:

राहुल नौकरी मांगने आया है।

यही उसका लक्ष्य है।


2. सीन में बाधा होनी चाहिए

अगर सब कुछ आसानी से मिल जाए तो सीन बोरिंग हो जाएगा।

उदाहरण:

इंटरव्यू लेने वाला व्यक्ति उसे रिजेक्ट कर देता है।

अब संघर्ष शुरू हो गया।


3. सीन में बदलाव होना चाहिए

सीन की शुरुआत और अंत एक जैसे नहीं होने चाहिए।

उदाहरण:

राहुल उम्मीद लेकर आया था।

अब वह निराश होकर जा रहा है।

यानी स्थिति बदल गई।

यह एक अच्छा सीन है।


सीन लिखते समय ध्यान रखें

कमरे का पूरा इतिहास मत लिखिए।

केवल वही लिखिए जो स्क्रीन पर दिखाई देगा।

गलत:

राहुल बचपन से बहुत दुखी रहा है।

सही:

राहुल पुराने फोटो को देखता है और उसकी आंखें नम हो जाती हैं।

दिखाइए, समझाइए मत।



अध्याय 6

दमदार डायलॉग कैसे लिखें?

बहुत सारे लेखक सोचते हैं कि लंबी-लंबी बातें करना ही अच्छा डायलॉग है।

लेकिन असलियत बिल्कुल उल्टी है।

सबसे अच्छे डायलॉग छोटे और असरदार होते हैं।

उदाहरण:

"मैं तुमसे प्यार करता हूं।"

यह सामान्य डायलॉग है।

लेकिन अगर कोई कहे—

"तुम्हारे बिना चाय भी फीकी लगती है।"

तो यह ज्यादा याद रहता है।


डायलॉग लिखने के नियम

1. हर पात्र की अलग आवाज हो

गांव का आदमी और शहर का आदमी एक जैसा नहीं बोलते।

बुजुर्ग और युवा भी अलग भाषा इस्तेमाल करते हैं।


2. असली जिंदगी सुनो

लोग रोजमर्रा में कैसे बात करते हैं, इस पर ध्यान दीजिए।

सबसे अच्छे डायलॉग सड़क, चाय की दुकान और दोस्तों की बातचीत से आते हैं।


3. कम शब्द, ज्यादा असर

खराब:

"मैं बहुत दुखी हूं क्योंकि आज मुझे नौकरी से निकाल दिया गया।"

बेहतर:

"आज ऑफिस आखिरी बार देखा।"

दर्शक खुद समझ जाएगा।


4. हर लाइन का उद्देश्य हो

सिर्फ जगह भरने के लिए डायलॉग मत लिखिए।

हर लाइन कहानी आगे बढ़ाए या चरित्र को दिखाए।


याद रखिए

लोग शब्द नहीं याद रखते।

भावना याद रखते हैं।

इसलिए भावना पर काम कीजिए।


अध्याय 7

अपनी पहली स्क्रीनप्ले कैसे पूरी करें?

सबसे बड़ी समस्या यह नहीं है कि लोग लिख नहीं पाते।

सबसे बड़ी समस्या यह है कि लोग लिखना पूरा नहीं कर पाते।

शुरुआत में उत्साह बहुत होता है।

लेकिन कुछ दिनों बाद ऊर्जा कम हो जाती है।

फिर कहानी अधूरी रह जाती है।


पहला नियम

परफेक्ट बनने की कोशिश मत कीजिए।

पहला ड्राफ्ट खराब होना सामान्य बात है।

हर महान लेखक का पहला ड्राफ्ट कमजोर होता है।

पहले कहानी पूरी कीजिए।

बाद में सुधार कीजिए।


दूसरा नियम

रोज थोड़ा लिखिए।

एक दिन में 20 पेज लिखने से बेहतर है रोज 2 पेज लिखना।

नियमितता सबसे बड़ी ताकत है।


तीसरा नियम

पहले रूपरेखा बनाइए।

लिखने से पहले यह तय कर लीजिए:

हीरो कौन है?

विलेन कौन है?

लक्ष्य क्या है?

अंत क्या होगा?

इससे लिखना आसान हो जाता है।


चौथा नियम

दूसरों को पढ़ाइए।

अपने दोस्तों, परिवार या साथी लेखकों को कहानी दिखाइए।

फीडबैक लीजिए।

लेकिन हर सलाह मानना जरूरी नहीं है।


पांचवां नियम

लिखते रहिए।

पहली कहानी खराब हो सकती है।

दूसरी भी।

तीसरी भी।

लेकिन दसवीं कहानी निश्चित रूप से पहली से बेहतर होगी।

लेखन एक कला नहीं, एक अभ्यास भी है।

जितना ज्यादा लिखेंगे, उतना बेहतर बनेंगे।


निष्कर्ष

स्क्रीनप्ले लिखना कोई जादू नहीं है।

यह एक कौशल है जिसे कोई भी सीख सकता है।

आपको केवल कुछ बातें याद रखनी हैं:

• कहानी में स्पष्ट लक्ष्य हो।

• हीरो के सामने संघर्ष हो।

• तीन एक्ट स्ट्रक्चर का उपयोग करें।

• हर सीन का उद्देश्य हो।

• डायलॉग छोटे और प्रभावी हों।

• पहला ड्राफ्ट पूरा करें।

• लगातार अभ्यास करें।

आज से ही अपनी पहली कहानी लिखना शुरू कर दीजिए।

क्योंकि दुनिया में सबसे बेहतरीन कहानी वह नहीं होती जो आपके दिमाग में है।

सबसे बेहतरीन कहानी वह होती है जो आपने लिखकर पूरी कर ली है।


बोनस अभ्यास

आज ही एक नोटबुक निकालिए और यह लिखिए:

  1. मेरा हीरो कौन है?

  2. उसका लक्ष्य क्या है?

  3. उसे कौन रोक रहा है?

  4. कहानी कहाँ शुरू होगी?

  5. कहानी कहाँ खत्म होगी?

इन पांच सवालों के जवाब मिल गए तो आपकी पहली स्क्रीनप्ले का जन्म हो चुका है।

लेखन शुरू कीजिए।

आपकी अगली कहानी शायद किसी फिल्म, वेब सीरीज या यूट्यूब शो की शुरुआत हो सकती है।


 
 
 

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